चारधाम यात्रा- 50 लाख के करीब श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, दूसरे चरण की तैयारियां तेज

चारधाम यात्रा- 50 लाख के करीब श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, दूसरे चरण की तैयारियां तेज

चारधाम यात्रा- 50 लाख के करीब श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, दूसरे चरण की तैयारियां तेज..

 

 

उत्तराखंड: चारधाम यात्रा अपने पहले चरण के अंतिम दौर में पहुंच गई है। 15 सितंबर से यात्रा का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। इस बीच चारों धामों में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या करीब 50 लाख पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस साल भी यात्रा के नया रिकॉर्ड बनाने की उम्मीद जताई जा रही है। मानसून के दौरान भी चारधाम यात्रा का संचालन जारी रहा। मौसम की चुनौतियों के बावजूद यात्रा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने पर प्रशासन और मंदिर समितियों की ओर से लगातार काम किया गया। अब यात्रा के दूसरे चरण में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की तैयारी है।

सुगम दर्शन पर सरकार का फोकस

चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं को लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी लगातार अधिकारियों के साथ समीक्षा कर रहे हैं। सरकार का जोर श्रद्धालुओं को कम से कम परेशानी के साथ दर्शन कराने और यात्रा मार्ग पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने कई स्तरों पर बदलाव किए हैं।

VIP व्यवस्था में बदलाव, पूजा के समय में भी कटौती

बीकेटीसी की ओर से धामों में वीआईपी संस्कृति को खत्म करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इसकी शुरुआत सीएम धामी ने स्वयं केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर आम श्रद्धालुओं की तरह दर्शन करके की थी। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिरों में सुबह और शाम होने वाली कुछ पूजाओं के समय में भी बदलाव किया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिल सके।

45 मंदिरों की व्यवस्थाएं संभालती है बीकेटीसी

बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के साथ ही बीकेटीसी के अधीन कुल 45 मंदिर आते हैं। धामों और अन्य मंदिरों में संवेदनशील स्थानों की पहचान कर सुरक्षा एवं निगरानी को मजबूत करने के लिए रोडमैप तैयार किया गया है। यात्रा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत एआई आधारित निगरानी और अन्य आधुनिक प्रणालियों को शामिल करने पर काम चल रहा है। श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में और सुधार करने की दिशा में भी बीकेटीसी की ओर से योजनाएं तैयार की जा रही हैं।

बीकेटीसी ने तीर्थपुरोहितों और हक-हकूकधारियों के हित में भी पहल की है। पहली बार इनके लिए कल्याण कोष बनाया गया है। आपातकालीन परिस्थितियों में इस कोष से तीर्थपुरोहितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही मंदिर समिति के कर्मचारियों के लिए भी अलग कल्याण कोष गठित करने पर विचार किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों को जरूरत के समय आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की योजना है। चारधाम यात्रा के दूसरे चरण में श्रद्धालुओं की संभावित बढ़ती भीड़ को देखते हुए अब प्रशासन और मंदिर समिति का मुख्य फोकस सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और बेहतर व्यवस्थाओं पर रहेगा।