शिक्षक संघ चुनाव में नई व्यवस्था लागू, सभी शिक्षक करेंगे मतदान, एक दिन तय..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में राजकीय शिक्षक संघ के चुनावी ढांचे में बड़ा बदलाव किया गया है। शासन ने संघ के संविधान में संशोधन को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब प्रत्येक शिक्षक को मतदान का अधिकार मिल गया है। नई व्यवस्था के तहत ब्लॉक, जिला, मंडल और प्रांतीय कार्यकारिणी के चुनाव अलग-अलग तिथियों पर नहीं, बल्कि एक ही दिन आयोजित किए जाएंगे। जारी आदेश के अनुसार चुनाव प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए हर ब्लॉक स्तर पर मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे। शिक्षक अपने-अपने ब्लॉक के निर्धारित मतदान केंद्र पर ही वोट डाल सकेंगे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि चुनाव केवल सरकारी अवकाश के दिन ही कराए जाएंगे, ताकि विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित न हो।
नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को चुनाव में भाग लेने के लिए किसी प्रकार का विशेष अवकाश, आकस्मिक अवकाश या यात्रा अवकाश नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही यात्रा या अन्य किसी प्रकार का भत्ता भी देय नहीं होगा। चुनाव से संबंधित सभी खर्च राजकीय शिक्षक संघ स्वयं वहन करेगा, राज्य सरकार इस पर कोई वित्तीय भार नहीं उठाएगी। चुनाव खर्च के पुनर्निर्धारण के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक को नियमों के तहत विचार करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और एकरूप बनाना है।
शिक्षक संघ ने जताई नाराजगी
नई व्यवस्था को लेकर शिक्षक संघ के भीतर असंतोष भी सामने आया है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने चुनाव के लिए छुट्टी न दिए जाने के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह संगठन को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि संघ की मांग केवल सभी शिक्षकों को मतदान का अधिकार देने तक सीमित थी, लेकिन इसमें अन्य शर्तें जोड़ दी गई हैं, जो व्यावहारिक नहीं हैं। सभी शिक्षकों को मतदान का अधिकार देने का मामला पहले न्यायालय तक पहुंचा था। इस संबंध में प्रवक्ता डॉ. अंकित जोशी द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि हर शिक्षक को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए, हालांकि उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चुनाव में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अवकाश की व्यवस्था होनी चाहिए।
पहले कैसी थी व्यवस्था..
अब तक राजकीय शिक्षक संघ के चुनाव डेलीगेट सिस्टम के तहत होते थे। इसमें एक से 10 शिक्षकों वाले विद्यालय से एक प्रतिनिधि और 11 से 20 शिक्षकों वाले विद्यालय से दो प्रतिनिधि मतदान करते थे। साथ ही ब्लॉक, जिला, मंडल और प्रांतीय स्तर के चुनाव अलग-अलग दिनों में आयोजित होते थे, जिनमें दो से तीन दिन का अधिवेशन भी शामिल रहता था। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद चुनाव प्रक्रिया अधिक समावेशी तो बनेगी, लेकिन एक ही दिन चुनाव और अवकाश न मिलने जैसे फैसलों को लेकर बहस भी तेज हो गई है।
