संयुक्त चिकित्सालय श्रीनगर में बढ़ेंगी स्वास्थ्य सुविधाएं, डीएम ने दिए सुधार के निर्देश..

संयुक्त चिकित्सालय श्रीनगर में बढ़ेंगी स्वास्थ्य सुविधाएं, डीएम ने दिए सुधार के निर्देश..

 

 

उत्तराखंड: संयुक्त चिकित्सालय श्रीनगर में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद, आपातकालीन सेवाओं के विस्तार और प्रसव सुविधाओं में सुधार की दिशा में कई अहम फैसले लिए गए हैं। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में गुरुवार को उप जिला चिकित्सालय श्रीनगर में आयोजित चिकित्सा प्रबंधन समिति की बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के दौरान अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं, चिकित्सकों और कर्मचारियों की स्थिति, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सा उपकरणों तथा मरीजों को मिल रही सेवाओं की समीक्षा की गई। अस्पताल प्रबंधन की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले समय की तुलना में भर्ती होने वाले मरीजों, बेड के उपयोग, ऑपरेशन, प्रसव और एक्स-रे की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस पर जिलाधिकारी ने अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों की जानकारी लेते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में स्त्री रोग विभाग को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत करीब 10 लाख रुपये की लागत से लैप्रोस्कोपिक सेट खरीदने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इससे महिलाओं की सर्जरी की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक होगी और मरीजों को कम परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा इमरजेंसी विभाग के लिए पांच मल्टीपैरा मॉनीटर और एक 12 चैनल ईसीजी मशीन खरीदने का निर्णय लिया गया। इन उपकरणों की खरीद जैम पोर्टल या निर्धारित निविदा प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी। प्रसव सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए मैटरनिटी टेबल खरीदने के निर्देश भी दिए गए।

गर्भवती महिलाओं और जरूरतमंद मरीजों को मिलेगी अतिरिक्त सुविधा

जिलाधिकारी ने गर्भवती महिलाओं को समय पर जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि खुशियों की सवारी सेवा का इस्तेमाल केवल प्रसव के लिए ही नहीं, बल्कि अल्ट्रासाउंड और अन्य जरूरी जांचों के लिए भी किया जाना चाहिए। इसके माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं को अस्पताल तक लाने और उपचार के बाद सुरक्षित घर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत श्रीनगर चिकित्सालय में काउंसलर की तैनाती करने के निर्देश दिए गए। बैठक में अस्पताल के छोटे निर्माण कार्यों के लिए बजट बढ़ाने और चिकित्सा प्रबंधन समिति के पास उपलब्ध धनराशि का बेहतर इस्तेमाल करने पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि अस्पताल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सभी खर्चों और प्रस्तावों का उचित प्रबंधन किया जाए। अधिकारियों को विभागीय समन्वय के साथ आवश्यक प्रस्ताव समय पर तैयार करने के निर्देश दिए गए।

आईसीयू और ऑक्सीजन प्लांट की व्यवस्थाओं का लिया जायजा

बैठक में अस्पताल प्रबंधन ने जानकारी दी कि पिछली बैठक में स्वीकृत फुली ऑटोमैटिक सीबीसी एनालाइजर और हार्मोनल एनालाइजर मशीनें खरीद ली गई हैं और दोनों सुचारु रूप से काम कर रही हैं। वहीं, ऑक्सीजन प्लांटों का अनुरक्षण कार्य पूरा होने के बाद उनका संचालन भी शुरू कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने सभी चिकित्सा उपकरणों और ऑक्सीजन संयंत्रों को नियमित रूप से क्रियाशील रखने तथा उनके रखरखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा।बैठक के बाद जिलाधिकारी ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों और विभागों का निरीक्षण भी किया। उन्होंने महिला एवं पुरुष वार्ड में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उपचार, भोजन और अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। महिला वार्ड में मरीजों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता भी जांची। इसके बाद उन्होंने आईसीयू, इमरजेंसी कक्ष, ऑपरेशन थियेटर, लेबर वार्ड, मेडिसिन ओपीडी, जन औषधि केंद्र, होम्योपैथी कक्ष और पैथोलॉजी लैब का निरीक्षण किया। आईसीयू की व्यवस्थाओं और संचालन को लेकर उन्होंने अस्पताल प्रबंधन की सराहना की।

अस्पताल से ही मिलेंगी डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाएं

फार्मेसी स्टोर का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने दवाओं के स्टॉक की जानकारी ली और आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि चिकित्सकों द्वारा मरीजों को लिखी गई निर्धारित दवाएं अस्पताल से ही निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएं। पैथोलॉजी लैब में उन्होंने अस्पताल में होने वाली सभी जांचों की सूची मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रदर्शित करने को कहा। साथ ही ओपीडी और इमरजेंसी सहित अन्य विभागों के बाहर भी वहां उपलब्ध सुविधाओं और जांचों की जानकारी चस्पा करने के निर्देश दिए, ताकि मरीजों और उनके तीमारदारों को भटकना न पड़े।

बच्चों के उपचार के लिए बनेगा शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र (अर्ली इंटरवेंशन सेंटर) की स्थापना और संचालन की संभावनाओं का भी जायजा लिया। इस केंद्र के माध्यम से बच्चों में सुनने की क्षमता से जुड़ी समस्याओं, विकासात्मक देरी और अन्य शारीरिक विकास संबंधी परेशानियों की शुरुआती स्तर पर पहचान की जा सकेगी। यहां ऑडियोमेट्री, आवश्यक जांच और थेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। केंद्र के लिए प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण करने पर भवन की स्थिति जर्जर मिली। इस पर जिलाधिकारी ने पुराने भवन के स्थान पर केंद्र के संचालन के लिए उपयुक्त व्यवस्थाएं विकसित करने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों को समय पर जांच, उपचार और पुनर्वास संबंधी सुविधाएं मिल सकें। जिलाधिकारी ने कहा कि अस्पताल आने वाले प्रत्येक मरीज को बेहतर और समयबद्ध उपचार मिलना चाहिए। इसके लिए चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता के साथ स्वच्छता, चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों का मरीजों के प्रति व्यवहार तथा उपचार की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को अस्पताल की व्यवस्थाओं में लगातार सुधार करने और मरीजों की जरूरतों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में नगर निगम की महापौर आरती भंडारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मेघना असवाल, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एलडी सेमवाल, उपजिलाधिकारी नूपुर वर्मा, प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रचित गर्ग सहित समिति के सदस्य और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।