ई-केवाईसी नहीं तो राशन नहीं! उत्तराखंड में सरकार ने जारी किया अलर्ट

ई-केवाईसी नहीं तो राशन नहीं! उत्तराखंड में सरकार ने जारी किया अलर्ट..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में राशन कार्डों के डिजिटल सत्यापन और ई-केवाईसी अभियान को तेज गति देने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक प्रक्रिया पूरी रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। राज्यभर में बड़ी संख्या में राशन कार्डधारकों का सत्यापन अभी बाकी है, जिससे खाद्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि तय समय सीमा के भीतर ई-केवाईसी पूरी नहीं हुई तो कई कार्ड अस्थायी रूप से निष्क्रिय किए जा सकते हैं और लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में दिक्कत आ सकती है।

प्रदेश में इन दिनों राशन कार्ड, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और आयुष्मान कार्ड समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों का डिजिटल वैरिफिकेशन अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में खाद्य विभाग ने राशन कार्डों की ई-केवाईसी प्रक्रिया को अनिवार्य किया है, ताकि अपात्र लोगों को हटाकर वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सके।

खाद्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक करीब 60 प्रतिशत राशन कार्डों का ही सत्यापन हो पाया है। सबसे धीमी प्रगति राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के कार्डों में देखने को मिल रही है, जहां केवल 53 प्रतिशत कार्डधारकों का ही वैरिफिकेशन पूरा हुआ है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 31 मई तक सभी पात्र लाभार्थियों को ई-केवाईसी करानी होगी। यदि केवल चंपावत जिले की बात करें तो यहां अन्त्योदय, बीपीएल और राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत कुल 60 हजार 247 राशन कार्ड पंजीकृत हैं। इनमें 5865 अन्त्योदय कार्ड, 29100 बीपीएल कार्ड और 25282 राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के कार्ड शामिल हैं। इन सभी लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य की गई है।

जिले में राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत कुल 1 लाख 65 हजार 933 यूनिट दर्ज हैं, जिनमें से अब तक केवल 1 लाख 16 हजार 190 लोगों ने ही ई-केवाईसी कराई है। वहीं अन्त्योदय और बीपीएल श्रेणी में कुल 96 हजार 410 यूनिट्स में से केवल 45 हजार 936 का ही सत्यापन पूरा हो पाया है। खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन लाभार्थियों ने अब तक ई-केवाईसी नहीं कराई है, उन्हें जल्द से जल्द नजदीकी राशन डीलर, जन सेवा केंद्र या संबंधित विभागीय कार्यालय पहुंचकर प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। विभाग का मानना है कि डिजिटल सत्यापन से फर्जी और अपात्र कार्डधारकों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जिससे सरकारी खाद्यान्न योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि भविष्य में राशन वितरण या अन्य सरकारी सुविधाओं में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।