देहरादून । दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से समय-समय पर देश के कौने-कौने में अनेकों भक्त श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से भक्तिमय रस का पान कराता है। इनके जरिए जहां एक और ग्रन्थों में निहित गुण आध्यात्मिक संदेश का प्रतिपादन हो रहा है वहीं दूसरी ओर श्रद्धालुओं व दिशा भ्रमित लोगों को ज्ञान दीक्षा की ओर से भक्ति की शाश्वत् विधि भी प्रदान की जा रही है। इसी श्रंखला के तहत देहरादून शाखा की ओर से सत्संग प्रवचन एवं भण्डारे का आयोजन किया गया। प्रस्तुतिकरण में साध्वी शिवा भारती ने गुरू की महिमा का गान करते हुए बताया कि संसार में सबसे सौभाग्यशाली वह शिष्य है जिसे पूर्ण गुरु का सानिध्य मिल जाता है। यूं तो परमात्मा को प्रत्येक जीव प्रिय होता है। लेकिन ब्रह्म ज्ञान पर चलने वाला शिष्य अति विशेष होता है। आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी नरेन्द्रानन्द ने प्रवचनों के माध्यम से बताया कि गुरू शिष्य की हृदय भूमि में ज्ञान का दिव्य बीज रोपित करते हैं। तब तक उसका संरक्षण करते है जब तक वो मोक्ष को न प्राप्त कर ले। स्वामी जी ने समझाया कि आत्मा का ध्यान ही मानव को आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है, इसलिए ध्यान प्रक्रिया की ओर से आत्मा के साथ निरंतर संचार और सम्पर्क में रहना अनिवार्य है लेकिन यह मात्र पूर्ण सतगुरु के मार्गदर्शन में ही संभव है। स्वामी ने बताया कि गुरु शिष्य के मार्ग में आने वाले संघर्ष से उसकी रक्षा करते है और उनका मार्गदर्शन करके इसे भक्ति मार्ग दर्शन करके उसे भक्ति मार्ग पर आगे की ओर प्रेरित करते है।
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