समान नागरिक संहिता पर महाराष्ट्र में हलचल, सरकार कर रही व्यापक विचार-विमर्श..
देश-विदेश: देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर बहस एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। उत्तराखंड और हाल ही में गुजरात में इस दिशा में कदम बढ़ाए जाने के बाद अब महाराष्ट्र में भी यूसीसी जैसे कानून की मांग जोर पकड़ने लगी है। राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और विभिन्न हितधारकों से परामर्श की प्रक्रिया जारी है। यह मुद्दा उस समय प्रमुखता से सामने आया जब भाजपा के विधान परिषद सदस्य परिणय फुके ने सदन में उत्तराखंड की तर्ज पर राज्य में भी समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान में स्पष्ट रूप से इस दिशा में प्रयास करने की बात कही गई है और वर्तमान में विवाह, तलाक, गोद लेने जैसे मामलों में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग कानून होने के कारण एकरूपता का अभाव है। फुके ने यह भी कहा कि जब कुछ राज्यों में इस तरह की पहल हो चुकी है, तो महाराष्ट्र जैसे बड़े और प्रगतिशील राज्य को भी इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने की वकालत करते हुए इसे सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए विधान परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोरहे ने बताया कि सरकार ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लिया है और इसे विभिन्न विभागों को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि यह विषय कई विभागों से जुड़ा हुआ है, जिसमें कानून एवं न्याय, महिला एवं बाल विकास और सामान्य प्रशासन जैसे विभाग शामिल हैं। सभी विभागों से निर्धारित समय के भीतर लिखित राय मांगी गई है, ताकि एक समग्र दृष्टिकोण तैयार किया जा सके। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय पर जल्दबाजी में निर्णय नहीं लिया जाएगा। इसके बजाय व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श और सभी पक्षों की राय लेने के बाद ही कोई ठोस कदम उठाया जाएगा। बता दे कि उत्तराखंड में पहले ही समान नागरिक संहिता से संबंधित कानून लागू किया जा चुका है, जबकि गुजरात में हाल ही में इस संबंध में विधेयक पेश किया गया है। वहीं गोवा में लंबे समय से समान नागरिक कानून जैसी व्यवस्था लागू है, जिसे अक्सर यूसीसी के उदाहरण के रूप में देखा जाता है। ऐसे में महाराष्ट्र में यूसीसी को लेकर उठ रही मांग और सरकार द्वारा शुरू की गई परामर्श प्रक्रिया को देशभर में चल रही इस बहस की एक अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या महाराष्ट्र भी यूसीसी लागू करने वाले राज्यों की सूची में शामिल होता है या नहीं।
