बर्फबारी के बाद मुनस्यारी में स्कीइंग की धूम, पर्यटन और रोजगार दोनों को मिल रहा बढ़ावा..

बर्फबारी के बाद मुनस्यारी में स्कीइंग की धूम, पर्यटन और रोजगार दोनों को मिल रहा बढ़ावा..

 

 

 

उत्तराखंड: सीमांत जिला पिथौरागढ़ स्थित हिमनगरी मुनस्यारी में बर्फबारी के बाद शुरू हुई स्कीइंग गतिविधियों ने स्थानीय पर्यटन को नई ऊर्जा दे दी है। ऊंची बर्फ से ढकी चोटियां, ढलानदार पहाड़ियां और पंचाचूली की हिमाच्छादित श्रृंखलाएं मुनस्यारी को साहसिक खेलों के लिए बेहद अनुकूल बनाती हैं। इन दिनों यहां पहुंचे पर्यटक और एडवेंचर स्पोर्ट्स के शौकीन स्नो स्कीइंग का भरपूर आनंद ले रहे हैं, जिससे क्षेत्र में रौनक बढ़ गई है। स्थानीय लोगों और पर्यटन से जुड़े लोगों का मानना है कि स्कीइंग जैसी गतिविधियों के बढ़ने से मुनस्यारी को उत्तराखंड के एक प्रमुख शीतकालीन पर्यटन स्थल के रूप में पहचान मिल सकती है। इससे होटल व्यवसाय, टैक्सी संचालन, गाइड सेवाओं और स्थानीय उत्पादों की बिक्री को भी सीधा लाभ मिल रहा है। साथ ही, स्थानीय युवाओं को स्कीइंग का प्रशिक्षण देकर उन्हें इस क्षेत्र से जोड़े जाने की पहल भी शुरू की गई है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

मुनस्यारी क्षेत्र में अधिक बर्फबारी होने पर बेटुली धार, डांडाधार और खलिया टॉप स्कीइंग के प्रमुख केंद्र बन जाते हैं। इन स्थलों पर घूमने पहुंचे सैलानी प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्नो स्कीइंग का अनुभव ले रहे हैं। बेटुली धार मुनस्यारी बाजार से करीब सात किलोमीटर दूर थल–मुनस्यारी मार्ग पर स्थित है। औली की तरह यहां सालभर बर्फ नहीं रहती, लेकिन सीजन में दो से तीन फीट तक हिमपात होने पर स्कीइंग के लिए अनुकूल हालात बन जाते हैं। स्थानीय जानकारों के अनुसार दो फीट बर्फ जमते ही बेटुली धार में स्कीइंग शुरू हो जाती है, जबकि अधिक हिमपात होने पर डांडाधार भी इस खेल के लिए उपयुक्त स्थल बन जाता है। इसके अलावा शीतकाल में खलिया टॉप में दो से पांच फीट तक बर्फ जम जाती है, जो इसे स्कीइंग के लिए आदर्श स्थान बनाती है। पिछले वर्षों में कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से यहां स्थानीय युवाओं को स्कीइंग का प्रशिक्षण दिया जाता रहा है और पर्यटक भी इस रोमांचक खेल का आनंद लेते रहे हैं। इस वर्ष जोहार क्लब की ओर से स्कीइंग प्रशिक्षण की पहल की गई, जिससे स्थानीय युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

हालांकि बीते कुछ वर्षों में मौसम के मिजाज में आए बदलाव के कारण हिमपात का पैटर्न भी बदला है। पहले नवंबर-दिसंबर से ही बर्फ गिरनी शुरू हो जाती थी और बेटुली धार में तीन से चार फीट तक बर्फ जमी रहती थी, लेकिन अब कई बार कम या देर से हिमपात होने के कारण हर साल स्कीइंग के पर्याप्त मौके नहीं मिल पाते। इस वजह से कभी-कभी साहसिक खेलों के शौकीनों को निराशा का सामना भी करना पड़ता है। मुनस्यारी के ट्रेकिंग टूर ऑपरेटर और स्कीइंग प्रशिक्षक नरेंद्र कुमार का कहना है कि मुनस्यारी अब एक उभरता हुआ पर्वतीय पर्यटन डेस्टिनेशन बन चुका है। यहां शीतकालीन खेलों की अपार संभावनाएं हैं। स्नो स्कीइंग के साथ-साथ माउंटेनियरिंग और रॉक क्लाइंबिंग जैसे साहसिक खेलों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।

उनका मानना है कि यदि शासन और प्रशासन इस दिशा में ठोस प्रयास करें तो खलिया टॉप को अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्नो स्कीइंग स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कीइंग और अन्य साहसिक गतिविधियों के विस्तार से सर्दियों के मौसम में भी पर्यटकों की आवाजाही बनी रहेगी, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलेंगे। प्राकृतिक सौंदर्य, बर्फीली चोटियां और रोमांचक खेलों का संगम आने वाले समय में मुनस्यारी को देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बना सकता है।