राजस्व सेवाएं हुईं पूरी तरह डिजिटल, अब घर बैठे मिलेगी सत्यापित खतौनी..

राजस्व सेवाएं हुईं पूरी तरह डिजिटल, अब घर बैठे मिलेगी सत्यापित खतौनी..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में राजस्व विभाग की सेवाओं को आम जनता के लिए सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तराखंड राजस्व परिषद की ओर से विकसित किए गए राजस्व विभाग से जुड़े छह महत्वपूर्ण वेब पोर्टलों का शनिवार को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शुभारंभ किया। इन पोर्टलों के जरिए अब भूमि और राजस्व से जुड़ी कई सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगी। लॉन्च किए गए वेब पोर्टलों में अपडेटेड ई-भूलेख, भू-नक्शा, भूलेख अंश, भू-अनुमति, एग्री लोन और ई-वसूली (ई-आरसीएस) पोर्टल शामिल हैं। इन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नागरिकों को घर बैठे ही राजस्व विभाग की विभिन्न सेवाओं का लाभ मिलेगा।

अब घर बैठे मिलेगी सत्यापित खतौनी..

ई-भूलेख पोर्टल के नए संस्करण के तहत भूमि अभिलेखों से जुड़ी सेवाओं को और अधिक सरल बनाया गया है। अब खतौनी की सत्यापित प्रति प्राप्त करने के लिए लोगों को तहसील कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नागरिक मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित शुल्क का भुगतान पेमेंट गेटवे के जरिए कर सकते हैं और घर बैठे प्रमाणित खतौनी प्राप्त कर सकेंगे। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी। भूलेख अंश पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के भू-अभिलेखों में दर्ज संयुक्त खातेदारी और गोल खातों के खातेदारों तथा सह-खातेदारों के अलग-अलग अंश का डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही खातेदारों की जाति, लिंग और पहचान संख्या जैसी जानकारियों को भी संकलित किया जा रहा है, जिससे भविष्य में समेकित भू-अभिलेख डाटाबेस और फार्मर रजिस्ट्री तैयार करने में मदद मिलेगी।

भू-अनुमति पोर्टल के जरिए प्रदेश में उद्योग और कृषि प्रयोजनों के लिए भूमि उपयोग या भूमि कार्य की अनुमति की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। विशेष रूप से हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में भू-कानून के तहत कृषि और बागवानी के लिए भूमि खरीद की अनुमति भी अब ऑनलाइन ही ली जा सकेगी। एग्री लोन पोर्टल के माध्यम से किसानों और भूमि स्वामियों को अपनी भूमि के सापेक्ष कृषि एवं कृषि संबंधी गतिविधियों के लिए बैंक से ऋण लेने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन कर दी गई है। अब किसान पोर्टल के जरिए सीधे लोन के लिए आवेदन कर सकेंगे। ऋण चुकता होने के बाद बैंक द्वारा एनओसी जारी करते ही भूमि से जुड़ा चार्ज स्वतः हट जाएगा।

ई-वसूली से बढ़ेगी पारदर्शिता..

ई-वसूली (ई-आरसीएस) पोर्टल के माध्यम से राजस्व वसूली की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है। अब बैंक और संबंधित विभाग अपने बकायेदारों के मामलों को ऑनलाइन माध्यम से कलेक्टर को भेज सकेंगे। पूरी वसूली प्रक्रिया की प्रत्येक स्तर पर ट्रैकिंग संभव होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। भू-नक्शा पोर्टल के तहत प्रदेश के भूमि मानचित्र (कैडस्ट्रल मैप) को सार्वजनिक डोमेन में निःशुल्क देखने की सुविधा भी शुरू की गई है। इससे भूमि से जुड़े विवादों और जानकारी प्राप्त करने में लोगों को आसानी होगी। सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया की परिकल्पना के अनुरूप राज्य सरकार विज्ञान, आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से आमजन को अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।

उन्होंने कहा कि इन छह वेब पोर्टलों के शुभारंभ से नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी, उनका जीवन सरल होगा और उन्हें दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सीएम धामी ने कहा कि ये सभी वेब एप्लीकेशन डिजिटल इंडिया, विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड के लक्ष्यों के अनुरूप आधुनिक तकनीकों से अपग्रेड की गई हैं। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ-साथ ईज ऑफ लिविंग को भी मजबूती मिलेगी।