एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. विजयकांत पुरोहित ‘कर्मयोगी सम्मान’ से सम्मानित..

एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. विजयकांत पुरोहित ‘कर्मयोगी सम्मान’ से सम्मानित..

एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. विजयकांत पुरोहित ‘कर्मयोगी सम्मान’ से सम्मानित..

 

 

उत्तराखंड: हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) के निदेशक डॉ. विजयकांत पुरोहित को हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की वैज्ञानिक खेती, किसानों के प्रशिक्षण और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘कर्मयोगी सम्मान’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान चमोली जिले के नंदानगर स्थित सितेल में आयोजित जड़ी-बूटी प्रशिक्षण एवं वितरण कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया। कार्यक्रम का आयोजन नेचर ऑर्गेनिक सोसायटी, नंदानगर और उद्योगिनी संस्था, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। डॉ. पुरोहित की अनुपस्थिति में उनके प्रतिनिधि डॉ. जयदेव चौहान ने यह सम्मान ग्रहण किया। समारोह में बड़ी संख्या में किसान, जड़ी-बूटी उत्पादक, शोधकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि डॉ. विजयकांत पुरोहित ने अपने वैज्ञानिक शोध को प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय उसे किसानों के खेतों तक पहुंचाकर व्यावहारिक रूप दिया, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती को नई दिशा मिली।

बताया गया कि उनके मार्गदर्शन में चमोली समेत उत्तराखंड के कई सीमांत जिलों के किसानों ने वैज्ञानिक पद्धति से औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती अपनाई है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ हिमालयी जैव विविधता के संरक्षण को भी मजबूती मिली है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. पुरोहित के प्रयासों से राज्य में जड़ी-बूटी आधारित खेती और उद्यमों को नई पहचान मिली है। इससे स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं और स्थानीय युवाओं का रुझान भी इस क्षेत्र की ओर बढ़ा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी डॉ. पुरोहित किसानों के मार्गदर्शन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए अपना योगदान जारी रखेंगे। ‘कर्मयोगी सम्मान’ को डॉ. विजयकांत पुरोहित की व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ हिमालयी औषधीय संपदा के संरक्षण, वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर की पहचान माना जा रहा है।