कैबिनेट फेरबदल का असर, धन सिंह रावत से स्वास्थ्य विभाग हटा, बंगाल में कर रहे प्रचार..

कैबिनेट फेरबदल का असर, धन सिंह रावत से स्वास्थ्य विभाग हटा, बंगाल में कर रहे प्रचार..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार में हुए हालिया कैबिनेट फेरबदल के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से करीब नौ वर्षों बाद स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। अब उनके पास विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, संस्कृत शिक्षा और सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी बनी रहेगी। डॉ. धन सिंह रावत लंबे समय से राज्य के स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। वर्ष 2017 में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के गठन के साथ ही उन्हें शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की भी कमान सौंपी गई थी। तब से लेकर अब तक वे लगातार इस विभाग को संभालते रहे, लेकिन हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में बदलाव करते हुए यह जिम्मेदारी उनसे वापस ले ली है।

शिक्षा और सहकारिता पर रहेगा फोकस..

स्वास्थ्य विभाग हटने के बाद अब डॉ. धन सिंह रावत का पूरा ध्यान शिक्षा और सहकारिता जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा। उनके पास विद्यालयी शिक्षा से लेकर उच्च और तकनीकी शिक्षा तक की जिम्मेदारी है, जो राज्य के भविष्य निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही सहकारिता विभाग भी उनके पास है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बदलाव के बीच डॉ. धन सिंह रावत ने अपने कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कार्यों को भी गिनाया है। वर्तमान में वे पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, जहां से उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया गया। उनके अनुसार इस अवधि में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे का विस्तार किया गया, अस्पतालों को सुदृढ़ किया गया और चिकित्सा सुविधाओं को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में डॉक्टरों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और नर्सिंग अधिकारियों सहित 10 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां की गईं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली।

डॉ. रावत ने यह भी कहा कि राज्य के पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना उनकी प्राथमिकता रही। इसके लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया गया और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धामी सरकार द्वारा किया गया यह फेरबदल प्रशासनिक प्राथमिकताओं और विभागीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए किया गया है। स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभाग में बदलाव को आने वाले समय की चुनौतियों के लिहाज से भी देखा जा रहा है। फिलहाल विभागों के इस पुनर्गठन के बाद अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नई जिम्मेदारियों के साथ मंत्री किस तरह काम करते हैं और सरकार की योजनाओं को किस गति से आगे बढ़ाते हैं।