यात्रा से पहले बढ़ी चिंता, यमुनोत्री में सुरक्षित घाट और रास्ते अधूरे, पुरोहितों का ज्ञापन..

यात्रा से पहले बढ़ी चिंता, यमुनोत्री में सुरक्षित घाट और रास्ते अधूरे, पुरोहितों का ज्ञापन..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। यात्रा शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं, इसके बावजूद यमुनोत्री मंदिर क्षेत्र में कई जरूरी व्यवस्थाएं अभी तक अधूरी पड़ी हैं। खासतौर पर तीर्थयात्रियों की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यात्रियों के लिए बनाए जाने वाले सुरक्षित स्नान घाटों का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है, जबकि कई पुराने घाट क्षतिग्रस्त अवस्था में ही पड़े हैं। यमुना नदी के किनारे आने-जाने के लिए सुरक्षित रास्तों का अभाव भी चिंता का विषय बना हुआ है। वर्तमान स्थिति में श्रद्धालुओं को नदी के किनारे खतरनाक और अस्थायी मार्गों से होकर गुजरना पड़ सकता है, जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है।

आपदा के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति

बता दे कि बीते वर्ष आई आपदा में यमुनोत्री मंदिर क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा था। इस दौरान स्नान घाट, पुजारी निवास, रसोई भंडार, शौचालय और घाटों को जोड़ने वाले पुल तक बह गए थे। इसके बावजूद अब तक पुनर्निर्माण कार्य पूरी तरह से नहीं हो पाया है। सुरक्षा की दृष्टि से यमुना घाट के दोनों ओर सुरक्षा दीवार का निर्माण भी अधूरा है। इसके साथ ही नदी तट तक पहुंचने के लिए सुरक्षित और स्थायी मार्ग भी तैयार नहीं किए जा सके हैं। ऐसे में इस बार की यात्रा के दौरान भी श्रद्धालुओं को जोखिम उठाना पड़ सकता है। इन अव्यवस्थाओं को लेकर तीर्थपुरोहितों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय पुरोहितों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर जल्द से जल्द आवश्यक सुरक्षा कार्य पूरे कराने की मांग की है। मंदिर समिति के प्रवक्ता और तीर्थपुरोहितों का कहना है कि इस बार मौसम अनुकूल रहने के बावजूद भी धाम की उपेक्षा की गई है। उनका आरोप है कि प्रशासन ने समय रहते आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता नहीं दी, जिससे अब यात्रा के ठीक पहले स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चारधाम यात्रा में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं। अधूरी व्यवस्थाओं के चलते दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

वैकल्पिक मार्ग का काम भी प्रभावित..

वहीं, जानकीचट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक बनाए जा रहे वैकल्पिक पैदल मार्ग का कार्य भी अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। वन विभाग द्वारा इस पर काम शुरू किया गया था, लेकिन लगातार बारिश और बर्फबारी के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। इस कारण यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षित आवाजाही को लेकर अतिरिक्त चुनौतियां सामने आ सकती हैं। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्थिति को लेकर कहा है कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी आवश्यक सुरक्षा इंतजाम पूरे कर लिए जाएंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता के आधार पर कार्य किए जा रहे हैं और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। बता दे कि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 का शुभारंभ 19 अप्रैल से होने जा रहा है। इसी दिन गंगोत्री मंदिर और यमुनोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके साथ ही यात्रा के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 6 मार्च से शुरू हो चुकी है और इस बार पिछले वर्षों की तुलना में अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन निर्धारित समय के भीतर सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर पाएगा या फिर श्रद्धालुओं को अधूरी तैयारियों के बीच ही यात्रा करनी पड़ेगी। फिलहाल यमुनोत्री धाम की मौजूदा स्थिति ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गंभीर हो सकता है।