लोकसंगीत पर आधारित ‘चक्रव्यूह’, उत्तराखंड की पहली म्यूजिकल कल्चरल फिल्म का ऐलान..
उत्तराखंड: उत्तराखंड सिनेमा के इतिहास में पहली बार म्यूजिकल कल्चरल फिल्म का निर्माण होने जा रहा है, जो राज्य की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक संगीत को बड़े पर्दे पर एक नई पहचान देगा। नए साल की शुरुआत के साथ इस महत्वाकांक्षी फिल्म ‘चक्रव्यूह’ का शुभारंभ देहरादून में विधिवत रूप से किया गया। कार्यक्रम में केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने फिल्म का शुभारंभ कर उत्तराखंड सिनेमा के इस नए प्रयोग को शुभकामनाएं दीं। फिल्म ‘चक्रव्यूह’ का निर्देशन युवा निर्देशक शुभम सेमवाल कर रहे हैं। यह फिल्म केदारघाटी के प्रतिष्ठित विद्वान और साहित्यकार आचार्य डॉ. कृष्णानन्द नौटियाल द्वारा लिखित प्रसिद्ध रचना ‘चक्रव्यूह’ पर आधारित है। फिल्म के माध्यम से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपराओं और संगीत विरासत को सजीव रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। यह फिल्म लगभग 90 मिनट तक लोकसंगीत से सजी होगी, जिसमें केदारघाटी में प्रचलित अनेक दुर्लभ और पारंपरिक लोक संगीत शैलियों को स्थान दिया गया है। इनमें पंडवली, जागर, नग्वली, रांसा, द्योपुरी, एड़्वली, मन्दाक्रान्ता, भार्ता, वीरनग्वली और बगड्वली जैसे लोक संगीत प्रमुख रूप से शामिल हैं।
फिल्म का उद्देश्य इन लोक विधाओं को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखकर, आने वाली पीढ़ियों तक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में पहुंचाना है। फिल्म के लिए लोकगीतों का गहन संकलन स्वयं आचार्य डॉ. कृष्णानन्द नौटियाल द्वारा किया गया है, जिससे इसकी प्रामाणिकता और सांस्कृतिक गहराई और अधिक बढ़ जाती है। वहीं, फिल्म के संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी अखिल मौर्य निभा रहे हैं, जो पारंपरिक लोक धुनों को आधुनिक सिनेमाई प्रस्तुति के साथ संतुलित रूप में पेश करेंगे। फिल्म से जुड़े कलाकारों और निर्माताओं का कहना है कि ‘चक्रव्यूह’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, इतिहास और संगीत को सहेजने का एक सशक्त प्रयास है। यह प्रयोग उत्तराखंड सिनेमा को एक नई दिशा देगा और क्षेत्रीय सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक साबित हो सकता है। फिल्म के शुभारंभ अवसर पर उपस्थित गणमान्य लोगों ने इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला कदम बताते हुए इसके सफल निर्माण और प्रदर्शन की कामना की।
इस फिल्म के मूल कथानक के रचनाकार आचार्य डॉ. कृष्णानन्द नौटियाल न केवल गढ़वाली चक्रव्यूह के सृजनकर्ता हैं, बल्कि उन्होंने महाभारत पर आधारित अनेक महत्वपूर्ण महानाट्यों की भी रचना, निर्देशन और मंचन किया है। डॉ. नौटियाल द्वारा रचित प्रमुख महानाट्यों में कमलव्यूह, मकरव्यूह, अर्जुनै नागलोक जतरा (गैण्डा-कौथिग) जैसे चर्चित नाट्य शामिल हैं, जो वर्षों से उत्तराखंड की लोकनाट्य परंपरा को समृद्ध करते आ रहे हैं। उनकी रचनाएं लोकसंस्कृति, पौराणिक कथाओं और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम प्रस्तुत करती हैं। फिल्म ‘चक्रव्यूह’ की परिकल्पना शैलेश नौटियाल द्वारा की गई है, जो इस परियोजना में एसोसिएट डायरेक्टर की अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे। फिल्म के निर्माता अनिरुद्ध सिंह बघेल हैं, जो उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को सिनेमा के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से इस परियोजना से जुड़े हैं।
फिल्म के शुभारंभ अवसर पर केदारनाथ क्षेत्र की विधायक आशा नौटियाल ने क्लैप देकर फिल्म की औपचारिक शुरुआत की और पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की सांस्कृतिक फिल्में उत्तराखंड की परंपराओं, लोकसंगीत और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘चक्रव्यूह’ राज्य की लोकसंस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस मौके पर केदारघाटी मंडाण के संरक्षक नरेंद्र रौथाण ने भी फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि यह फिल्म उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, संगीत और पारंपरिक परंपराओं को भव्य सिनेमाई रूप में प्रस्तुत करेगी। उनके अनुसार, ‘चक्रव्यूह’ दर्शकों के दिलों से जुड़ने के साथ-साथ उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगी। फिल्म से जुड़े कलाकारों और निर्माताओं का मानना है कि यह परियोजना उत्तराखंड सिनेमा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी और लोकसंस्कृति आधारित फिल्मों को एक नई दिशा देगी।
