सीमा सड़क परियोजना में बड़ी कार्रवाई, 480 भवनों पर चलेगा बुलडोजर..

सीमा सड़क परियोजना में बड़ी कार्रवाई, 480 भवनों पर चलेगा बुलडोजर..

 

 

 

उत्तराखंड: सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में चीन सीमा को जोड़ने वाले सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण की प्रक्रिया ने स्थानीय आबादी की चिंता बढ़ा दी है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग के विस्तारीकरण की जद में करीब 480 मकान, दुकानें और गौशालाएं आ रही हैं, जिन्हें ध्वस्त किया जाना प्रस्तावित है। प्रशासन की ओर से नोटिस जारी होते ही प्रभावित क्षेत्रों में हड़कंप मच गया है। टनकपुर से पिथौरागढ़ तक लगभग 150 किलोमीटर लंबा मार्ग ऑल वेदर रोड के रूप में विकसित किया जा चुका है। वहीं पिथौरागढ़ से बलुवाकोट तक भी करीब 70 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण पूरा हो चुका है। अब बलुवाकोट के बिन्या गांव से तवाघाट तक 35 किलोमीटर लंबे हिस्से में सड़क चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित है। इसी खंड में सबसे अधिक आबादी सड़क की जद में आ रही है। बताया जा रहा है कि सतगढ़ और गुड़ौली क्षेत्र में करीब 500 मीटर हिस्से में पहाड़ी कटिंग भी की जानी है। धारचूला से तवाघाट की ओर सड़क चौड़ीकरण का कार्य पहले से ही प्रगति पर है, जबकि बलुवाकोट से धारचूला के बीच आबादी घनी होने के कारण मुआवजा वितरण की प्रक्रिया के चलते कार्य रुका हुआ था। अब मुआवजा वितरण के बाद प्रशासन ने बाधा बन रहे निर्माणों को हटाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

प्रभावित भवन स्वामियों और व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें एक सप्ताह के भीतर मकान और दुकानें खाली करने का अल्टीमेटम दिया है, जो बेहद कम समय है। कई परिवारों का दावा है कि उन्हें अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है, ऐसे में इतनी कम अवधि में वैकल्पिक व्यवस्था कर पाना संभव नहीं है। प्रभावितों ने प्रशासन से कम से कम दो से तीन महीने का समय दिए जाने की मांग की है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाना है। उनके अनुसार अधिकांश प्रभावित परिवारों को मुआवजा वितरित किया जा चुका है और यदि कोई पात्र व्यक्ति छूट गया है तो उसके मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर करीब 90 करोड़ रुपये का मुआवजा प्रस्तावित है, जिसमें से लगभग 70 करोड़ रुपये पहले ही वितरित किए जा चुके हैं, जबकि शेष 20 करोड़ रुपये जल्द बांटे जाने की बात कही जा रही है।

कालिका, छारछुम सहित अन्य कस्बों में भी कई मकान और दुकानें सड़क की जद में आ रही हैं। इनमें से अधिकांश निर्माणों का केवल आगे का हिस्सा ही तोड़ा जाना है। यही वजह है कि कुछ भवन स्वामियों ने प्रशासनिक कार्रवाई से पहले स्वयं ही अपने मकानों का आंशिक ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया है। स्थानीय निवासी एसएस दताल ने बताया कि उनके मकान का करीब चार फीट हिस्सा सड़क के दायरे में आ रहा था, जिसे उन्होंने मजदूर लगाकर हटवा दिया है। उन्हें मुआवजे की राशि भी मिल चुकी है। टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग न केवल सीमांत क्षेत्रों की कनेक्टिविटी के लिए अहम है, बल्कि सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में प्रशासन जहां तेजी से कार्य पूरा करने पर जोर दे रहा है, वहीं स्थानीय लोग मानवीय आधार पर पर्याप्त समय और समुचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।